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mahabharat 1.216.25: महाराज, आप इस बभ्रुवाहन को चित्रांगदा से शुल्क के रूप में स्वीकार करें, इससे मैं आपके ऋण से मुक्त हो जाऊँगा।॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.216.25 
चित्राङ्गदाया: शुल्कं त्वं गृहाण बभ्रुवाहनम्।
अनेन च भविष्यामि ऋणान्मुक्तो नराधिप॥ २५॥
 
 
अनुवाद
महाराज, आप इस बभ्रुवाहन को चित्रांगदा से शुल्क के रूप में स्वीकार करें, इससे मैं आपके ऋण से मुक्त हो जाऊँगा।॥25॥
 
'Maharaj, please accept this Babhruvahana as fee from Chitrangada, this will free me from my debt to you.'॥ 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)