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mahabharat 1.216.22: महाराज! जल से बाहर आकर तथा अपने मूल स्वरूप को प्राप्त करके अप्सराएँ पहले जैसी दिखने लगीं।   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.216.22 
उत्थाय च जलात् तस्मात् प्रतिलभ्य वपु: स्वकम्।
तास्तदाप्सरसो राजन्नदृश्यन्त यथा पुरा॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जल से बाहर आकर तथा अपने मूल स्वरूप को प्राप्त करके अप्सराएँ पहले जैसी दिखने लगीं।
 
King! After emerging from the water and regaining their original form, the Apsaras began to appear as before. 22
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)