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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.216.20 
एतास्तु मम ता: सख्यश्चतस्रोऽन्या जले श्रिता:।
कुरु कर्म शुभं वीर एता: सर्वा विमोक्षय॥ २०॥
 
 
अनुवाद
ये मेरे चार अन्य मित्र हैं जो अभी भी जल में हैं। हे वीर! कृपया यह पुण्य कार्य करो; इन सबको शाप से मुक्त करो।
 
These are my four other friends who are still in the water. O brave one! Please do this pious deed; free them all from the curse.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)