Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.216.18-19: ‘वहाँ पुरुषों में श्रेष्ठ पाण्डुपुत्र धनंजय शीघ्र ही पहुँचकर तुम्हें इस दुःख से मुक्त कर देंगे, इसमें संशय नहीं है।’ वीर अर्जुन! नारदजी के ये वचन सुनकर हम सब मित्र यहाँ आये हैं। अनघ! आज तुमने सचमुच मुझे उस शाप से मुक्त कर दिया है।॥18-19॥ | mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘वहाँ पुरुषों में श्रेष्ठ पाण्डुपुत्र धनंजय शीघ्र ही पहुँचकर तुम्हें इस दुःख से मुक्त कर देंगे, इसमें संशय नहीं है।’ वीर अर्जुन! नारदजी के ये वचन सुनकर हम सब मित्र यहाँ आये हैं। अनघ! आज तुमने सचमुच मुझे उस शाप से मुक्त कर दिया है।॥18-19॥
'There, the pure souled son of Pandu, Dhananjay, the best amongst men, will soon reach there and free you from this sorrow, there is no doubt about it.' Brave Arjun! On hearing these words of Naradji, all of us friends came here. Anagh! Today you have really freed me from that curse. ॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥