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mahabharat 1.216.17: 'दक्षिण समुद्र के तट के निकट पाँच तीर्थ हैं, जो अत्यंत पुण्यमय और अत्यंत सुंदर हैं। तुम सब लोग वहाँ जाओ, विलम्ब न करो।॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.216.17 
दक्षिणे सागरानूपे पञ्च तीर्थानि सन्ति वै।
पुण्यानि रमणीयानि तानि गच्छत मा चिरम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'दक्षिण समुद्र के तट के निकट पाँच तीर्थ हैं, जो अत्यंत पुण्यमय और अत्यंत सुंदर हैं। तुम सब लोग वहाँ जाओ, विलम्ब न करो।॥17॥
 
'There are five places of pilgrimage near the shore of the southern sea, which are extremely virtuous and extremely beautiful. All of you should go there, do not delay.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)