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mahabharat 1.216.1: वर्गा ने कहा - हे भरतवंशी महापुरुष! उस ब्राह्मण का शाप सुनकर हम सब लोग बहुत दुःखी हुए। तब हम सब उस तपस्वी ब्राह्मण की शरण में गए, जो अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होता था॥1॥   |   mahabharat अध्याय 1.216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 216: वर्गाकी प्रार्थनासे अर्जुनका शेष चारों अप्सराओंको भी शापमुक्त करके मणिपूर जाना और चित्रांगदासे मिलकर गोकर्णतीर्थको प्रस्थान करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.216.1 
वर्गोवाच
ततो वयं प्रव्यथिता: सर्वा भारतसत्तम।
अयाम शरणं विप्रं तं तपोधनमच्युतम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वर्गा ने कहा - हे भरतवंशी महापुरुष! उस ब्राह्मण का शाप सुनकर हम सब लोग बहुत दुःखी हुए। तब हम सब उस तपस्वी ब्राह्मण की शरण में गए, जो अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होता था॥1॥
 
Varga said - O great man of Bharat dynasty! We were very sad to hear the curse of that Brahmin. Then all of us went to the shelter of that ascetic Brahmin who never deviated from his religion.॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)