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mahabharat 1.215.8: वैशम्पायनजी कहते हैं - उनके वचन सुनकर कौरवों में श्रेष्ठ और महान भुजाओं वाले अर्जुन उन भक्तों के मना करने पर भी उन तीर्थों का दर्शन करने चले गए॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.215.8 
वैशम्पायन उवाच
तेषां श्रुत्वा महाबाहुर्वार्यमाणस्तपोधनै:।
जगाम तानि तीर्थानि द्रष्टुं पुरुषसत्तम:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - उनके वचन सुनकर कौरवों में श्रेष्ठ और महान भुजाओं वाले अर्जुन उन भक्तों के मना करने पर भी उन तीर्थों का दर्शन करने चले गए॥8॥
 
Vaishampayanji says - Hearing his words, Arjun, the best of the Kurus and having great arms, went to visit those places of pilgrimage despite the refusal of those devotees. 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)