हमारे अहंकार से क्रुद्ध होकर ब्राह्मण ने हमें शाप दे दिया - 'तुम सौ वर्षों तक जल में मगरमच्छ बनकर रहोगे।'॥ 23॥
Enraged by our arrogance, the Brahmin cursed us - 'You will live as crocodiles in water for a hundred years.'॥ 23॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वण्यर्जुनवनवासपर्वणि तीर्थग्राहविमोचने पञ्चदशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अर्जुनवनवासपर्वमें तीर्थग्राहविमोचनविषयक दो सौ पंद्रहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१५॥