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mahabharat 1.215.20-21: भरत! मैं, सौरभेयी, समीचि, बुदबुदा और लता - हम पाँचों मिलकर उस ब्राह्मण के पास गए और हँसने-गाने लगे, उसे लुभाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  1.215.20-21 
अहं च सौरभेयी च समीची बुद्‍बुदा लता॥ २०॥
यौगपद्येन तं विप्रमभ्यगच्छाम भारत।
गायन्त्योऽथ हसन्त्यश्च लोभयित्वा च तं द्विजम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरत! मैं, सौरभेयी, समीचि, बुदबुदा और लता - हम पाँचों मिलकर उस ब्राह्मण के पास गए और हँसने-गाने लगे, उसे लुभाने लगे।
 
Bharata! I, Saurabheyi, Samichi, Budbuda and Lata - all five of us went together to that Brahmin and started laughing and singing, luring him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)