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mahabharat 1.215.2: उन दिनों तपस्वी लोग पाँच तीर्थों को छोड़कर जाते थे। ये वही तीर्थ थे जो पूर्वकाल में तपस्वी मुनियों से भरे रहते थे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.215.2 
वर्जयन्ति स्म तीर्थानि तत्र पञ्च स्म तापसा:।
अवकीर्णानि यान्यासन् पुरस्तात् तु तपस्विभि:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों तपस्वी लोग पाँच तीर्थों को छोड़कर जाते थे। ये वही तीर्थ थे जो पूर्वकाल में तपस्वी मुनियों से भरे रहते थे॥ 2॥
 
In those days ascetics used to leave five sacred places. These were the same sacred places which in the past were crowded with ascetic saints.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)