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mahabharat 1.215.18: वह अत्यन्त सुन्दर था और एकान्त में वेदों का अध्ययन करता था। राजन! उसकी तपस्या से सम्पूर्ण वन क्षेत्र प्रकाशमान हो रहा था। 18॥   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.215.18 
रूपवन्तमधीयानमेकमेकान्तचारिणम्।
तस्यैव तपसा राजंस्तद् वनं तेजसाऽऽवृतम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वह अत्यन्त सुन्दर था और एकान्त में वेदों का अध्ययन करता था। राजन! उसकी तपस्या से सम्पूर्ण वन क्षेत्र प्रकाशमान हो रहा था। 18॥
 
He was very handsome and used to study the Vedas in solitude. Rajan! Due to his penance the entire forest area was becoming bright. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)