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mahabharat 1.215.17: एक दिन मैं उन सबके साथ जगत के रक्षक कुबेर के घर जा रहा था। रास्ते में हमें एक ब्राह्मण दिखाई दिया जो उत्तम व्रत का पालन कर रहा था॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.215.17 
ताभि: सार्धं प्रयातास्मि लोकपालनिवेशनम्।
तत: पश्यामहे सर्वा ब्राह्मणं संशितव्रतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
एक दिन मैं उन सबके साथ जगत के रक्षक कुबेर के घर जा रहा था। रास्ते में हमें एक ब्राह्मण दिखाई दिया जो उत्तम व्रत का पालन कर रहा था॥17॥
 
One day I was going to the house of the protector of the world, Kubera, along with all of them. On the way we saw a Brahmin who was observing the best fast.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)