श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.215.15 
वर्गोवाच
अप्सरास्मि महाबाहो देवारण्यविहारिणी॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वरगा ने कहा- महाबाहु! मैं नंदनवन में विचरण करने वाली अप्सरा हूँ॥15॥
 
Varga said – Great arms! I am an Apsara who wanders in Nandanvan. 15॥
 ✨ ai-generated