vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ
»
श्लोक 15
श्लोक
1.215.15
वर्गोवाच
अप्सरास्मि महाबाहो देवारण्यविहारिणी॥ १५॥
अनुवाद
वरगा ने कहा- महाबाहु! मैं नंदनवन में विचरण करने वाली अप्सरा हूँ॥15॥
Varga said – Great arms! I am an Apsara who wanders in Nandanvan. 15॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd
Download Vedamrit Android App
Install
×