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mahabharat 1.215.11: परन्तु बलवानों में श्रेष्ठ, कुंती का पराक्रमी पुत्र उछल पड़ा और उस जलचर को लेकर जल से बाहर निकल आया।   |   mahabharat अध्याय 1.215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 215: अर्जुनके द्वारा वर्गा अप्सराका ग्राहयोनिसे उद्धार तथा वर्गाकी आत्मकथाका आरम्भ  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.215.11 
स तमादाय कौन्तेयो विस्फुरन्तं जलेचरम्।
उदतिष्ठन्महाबाहुर्बलेन बलिनां वर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परन्तु बलवानों में श्रेष्ठ, कुंती का पराक्रमी पुत्र उछल पड़ा और उस जलचर को लेकर जल से बाहर निकल आया।
 
But the mighty son of Kunti, the greatest among the strong, leaped and jumped out of the water carrying the aquatic creature.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)