Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.214.6-7: भारत फिर उस यात्रा के दौरान कौरवों में सर्वश्रेष्ठ धनंजय ने कई तीर्थ स्थलों का दौरा किया और नैमिषारण्यतीर्थ में बहने वाली सुंदर उत्पलिनी नदी, नंदा, अपर्णंदा, यशस्विनी कौशिकी (कोसी), महानदी, गायतीर्थ और गंगाजी को भी देखा। 6-7॥ | mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आनुपूर्व्येण तीर्थानि दृष्टवान् कुरुसत्तम:।
नदीं चोत्पलिनीं रम्यामरण्यं नैमिषं प्रति॥ ६॥
नन्दामपरनन्दां च कौशिकीं च यशस्विनीम्।
महानदीं गयां चैव गङ्गामपि च भारत॥ ७॥
अनुवाद
भारत फिर उस यात्रा के दौरान कौरवों में सर्वश्रेष्ठ धनंजय ने कई तीर्थ स्थलों का दौरा किया और नैमिषारण्यतीर्थ में बहने वाली सुंदर उत्पलिनी नदी, नंदा, अपर्णंदा, यशस्विनी कौशिकी (कोसी), महानदी, गायतीर्थ और गंगाजी को भी देखा। 6-7॥
India Then during that journey, Dhananjay, the best Kurus, visited many pilgrimage sites and also saw the beautiful Utpalini river, Nanda, Aparnanda, Yashaswini Kaushiki (Kosi), Mahanadi, Gayatirtha and Gangaji flowing in Naimisharanyatirtha. 6-7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥