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mahabharat 1.214.5: जनमेजय! तत्पश्चात् भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्जुन हिमालय से उतरकर पूर्व दिशा की ओर चले॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.214.5 
अवतीर्य नरश्रेष्ठो ब्राह्मणै: सह भारत।
प्राचीं दिशमभिप्रेप्सुर्जगाम भरतर्षभ:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! तत्पश्चात् भरतवंशियों में श्रेष्ठ अर्जुन हिमालय से उतरकर पूर्व दिशा की ओर चले॥5॥
 
Janamejaya! After that, coming down from the Himalayas, Arjun, the best of the Bharata clans, moved towards the east. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)