Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.214.27: उसके गर्भ से पुत्र उत्पन्न होने पर अर्जुन ने उस सुन्दरी को हृदय से लगाकर विदा ली और राजा चित्रवाहन से अनुरोध करके पुनः तीर्थों की यात्रा के लिए चल पड़े।   |   mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.214.27 
तस्यां सुते समुत्पन्ने परिष्वज्य वराङ्गनाम्।
आमन्त्र्य नृपतिं तं तु जगाम परिवर्तितुम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
उसके गर्भ से पुत्र उत्पन्न होने पर अर्जुन ने उस सुन्दरी को हृदय से लगाकर विदा ली और राजा चित्रवाहन से अनुरोध करके पुनः तीर्थों की यात्रा के लिए चल पड़े।
 
After a son was born from her womb, Arjun embraced the beautiful lady and took leave of her. After asking King Chitravahan, he once again set out to visit the holy places.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि अर्जुनवनवासपर्वणि चित्राङ्गदासङ्गमे चतुर्दशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अर्जुनवनवासपर्वमें चित्रांगदासमागमविषयक दो सौ चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)