Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.214.24-25: यद्यपि वह पुत्री है, फिर भी कारणवश (अर्थात् उससे जो प्रथम पुत्र उत्पन्न होगा, वही मेरा पुत्र माना जाएगा) मैंने उसे पुत्र नाम दिया है। हे भरतश्रेष्ठ! उससे जो तुम्हारा पुत्र उत्पन्न होगा, वही यहीं रहकर इस कुल की परम्परा को आगे बढ़ाएगा; इस पुत्री के विवाह के लिए तुम्हें यही शुल्क देना होगा। हे पाण्डुपुत्र! इसी शर्त पर तुम्हें उसे स्वीकार करना चाहिए।॥24-25॥ | mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यद्यपि वह पुत्री है, फिर भी कारणवश (अर्थात् उससे जो प्रथम पुत्र उत्पन्न होगा, वही मेरा पुत्र माना जाएगा) मैंने उसे पुत्र नाम दिया है। हे भरतश्रेष्ठ! उससे जो तुम्हारा पुत्र उत्पन्न होगा, वही यहीं रहकर इस कुल की परम्परा को आगे बढ़ाएगा; इस पुत्री के विवाह के लिए तुम्हें यही शुल्क देना होगा। हे पाण्डुपुत्र! इसी शर्त पर तुम्हें उसे स्वीकार करना चाहिए।॥24-25॥
‘Although she is a daughter, still for the sake of reason (i.e. the first son born to her will be considered my son) I have given her the name of a son. O best of Bharatas! The one son born to you from her will stay here and carry forward the tradition of this family; this is the fee you will have to pay for the marriage of this daughter. O son of Pandu! You should accept her on this condition only.’॥24-25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥