Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.214.22-23: इसी कारण हमारे कुल में सदैव एक ही सन्तान हुई है। मेरे अन्य सभी पूर्वजों के पुत्र हुए हैं, परन्तु मेरी एक ही पुत्री है। वही इस कुल की परम्परा को आगे बढ़ाएगी। अतः हे भरतश्रेष्ठ! मेरा उसके प्रति यही भाव है कि 'वह मेरी पुत्री है'॥ 22-23॥ | mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एकैक: प्रसवस्तस्माद् भवत्यस्मिन् कुले सदा।
तेषां कुमारा: सर्वेषां पूर्वेषां मम जज्ञिरे॥ २२॥
एका च मम कन्येयं कुलस्योत्पादिनी भृशम्।
पुत्रो ममायमिति मे भावना पुरुषर्षभ॥ २३॥
अनुवाद
इसी कारण हमारे कुल में सदैव एक ही सन्तान हुई है। मेरे अन्य सभी पूर्वजों के पुत्र हुए हैं, परन्तु मेरी एक ही पुत्री है। वही इस कुल की परम्परा को आगे बढ़ाएगी। अतः हे भरतश्रेष्ठ! मेरा उसके प्रति यही भाव है कि 'वह मेरी पुत्री है'॥ 22-23॥
‘For this reason, our family has always had only one child. All my other ancestors have had sons, but I have had only one daughter. She is the one who will carry forward the tradition of this family. Therefore, O best of the Bharatas! My only feeling towards her is that ‘she is my son’॥ 22-23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥