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mahabharat 1.214.17: अतः राजा से मिलकर उसने अपनी मंशा इस प्रकार प्रकट की - 'महाराज! आप अपनी यह कन्या मुझ महाहृदयी क्षत्रिय को दे दीजिए।'॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.214.17 
अभिगम्य च राजानमवदत् स्वं प्रयोजनम्।
देहि मे खल्विमां राजन् क्षत्रियाय महात्मने॥ १७॥
 
 
अनुवाद
अतः राजा से मिलकर उसने अपनी मंशा इस प्रकार प्रकट की - 'महाराज! आप अपनी यह कन्या मुझ महाहृदयी क्षत्रिय को दे दीजिए।'॥17॥
 
So, after meeting the king, he expressed his intention thus - 'Maharaj! Please give this daughter of yours to me, this great-hearted Kshatriya.'॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)