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mahabharat 1.214.11: परन्तु वीर कुन्तीपुत्र धनंजय उन ब्राह्मणों से अनुमति लेकर कुछ सहायकों के साथ उस स्थान पर चले गये जहाँ समुद्र में लहरें उठ रही थीं।   |   mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.214.11 
स तु तैरभ्यनुज्ञात: कुन्तीपुत्रो धनंजय:।
सहायैरल्पकै: शूर: प्रययौ यत्र सागर:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
परन्तु वीर कुन्तीपुत्र धनंजय उन ब्राह्मणों से अनुमति लेकर कुछ सहायकों के साथ उस स्थान पर चले गये जहाँ समुद्र में लहरें उठ रही थीं।
 
But the valiant Dhananjaya, son of Kunti, taking permission from those brahmins, went with a few helpers to the place where the sea waves. 11.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)