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mahabharat 1.214.10: और उन तीर्थस्थानों का दर्शन करके वहाँ यथाविधि धन का दान किया। कलिंग देश के द्वार पर पहुँचकर अर्जुन के साथ आए ब्राह्मणों ने वहाँ से आज्ञा ली और वहाँ से लौट गए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 214: अर्जुनका पूर्वदिशाके तीर्थोंमें भ्रमण करते हुए मणिपूरमें जाकर चित्रांगदाका पाणिग्रहण करके उसके गर्भसे एक पुत्र उत्पन्न करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.214.10 
दृष्ट्वा च विधिवत् तानि धनं चापि ददौ तत:।
कलिङ्गराष्ट्रद्वारेषु ब्राह्मणा: पाण्डवानुगा:।
अभ्यनुज्ञाय कौन्तेयमुपावर्तन्त भारत॥ १०॥
 
 
अनुवाद
और उन तीर्थस्थानों का दर्शन करके वहाँ यथाविधि धन का दान किया। कलिंग देश के द्वार पर पहुँचकर अर्जुन के साथ आए ब्राह्मणों ने वहाँ से आज्ञा ली और वहाँ से लौट गए॥10॥
 
And after visiting those pilgrimage places, he made donations of wealth there as per the rituals. After reaching the gate of Kalinga nation, the Brahmins accompanying Arjun took permission from there and returned from there.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)