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mahabharat 1.213.8: जब कुन्तीकुमार और उनके ब्राह्मण साथी गंगा के द्वार पर रुके, तो उन ब्राह्मणों ने अनेक स्थानों पर अग्निहोत्र के लिए अग्नि प्रज्वलित की।   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.213.8 
निविष्टे तत्र कौन्तेये ब्राह्मणेषु च भारत।
अग्निहोत्राणि विप्रास्ते प्रादुश्चक्रुरनेकश:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
जब कुन्तीकुमार और उनके ब्राह्मण साथी गंगा के द्वार पर रुके, तो उन ब्राह्मणों ने अनेक स्थानों पर अग्निहोत्र के लिए अग्नि प्रज्वलित की।
 
When Kuntikumar and his Brahmin companions stopped at the entrance of Ganga, those Brahmins lit fire for Agnihotra at several places. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)