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mahabharat 1.213.7: जनमेजय! पाण्डवों में श्रेष्ठ और शुद्धचित्त धनंजय ने गंगाद्वार पर अर्जुन का जो अद्भुत कार्य किया था, उसे सुनो।   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.213.7 
तत्र तस्याद्‍भुतं कर्म शृणु त्वं जनमेजय।
कृतवान् यद् विशुद्धात्मा पाण्डूनां प्रवरो हि स:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जनमेजय! पाण्डवों में श्रेष्ठ और शुद्धचित्त धनंजय ने गंगाद्वार पर अर्जुन का जो अद्भुत कार्य किया था, उसे सुनो।
 
Janamejaya! Listen to the wonderful deed of Arjuna at Gangadwar, which was performed by Dhananjaya, the best among the Pandavas and having a pure mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)