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mahabharat 1.213.5-6: भारतवर्ष में पुरुषोत्तम अर्जुन ने मार्ग में अनेक सुन्दर एवं विचित्र वन, सरोवर, नदियाँ, समुद्र, देश और मृत्युलोक देखे। धीरे-धीरे गंगाद्वार (हरिद्वार) पहुँचकर महाबली पार्थ ने वहाँ डेरा डाला। 5-6॥   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  1.213.5-6 
रमणीयानि चित्राणि वनानि च सरांसि च।
सरित: सागरांश्चैव देशानपि च भारत॥ ५॥
पुण्यान्यपि च तीर्थानि ददर्श भरतर्षभ:।
स गङ्गाद्वारमाश्रित्य निवेशमकरोत् प्रभु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भारतवर्ष में पुरुषोत्तम अर्जुन ने मार्ग में अनेक सुन्दर एवं विचित्र वन, सरोवर, नदियाँ, समुद्र, देश और मृत्युलोक देखे। धीरे-धीरे गंगाद्वार (हरिद्वार) पहुँचकर महाबली पार्थ ने वहाँ डेरा डाला। 5-6॥
 
India Arjuna, the best of men, saw many beautiful and strange forests, lakes, rivers, oceans, countries and places of death on the way. Gradually, after reaching Gangadwar (Hardwar), the mighty Partha camped there. 5-6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)