Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.213.36-d1: जाते समय उन्होंने अर्जुन को यह वरदान दिया कि वह जल में अजेय होगा और सभी जलचर उसके वश में होंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है। इस प्रकार अर्जुन ने उलूपी के गर्भ से इरावन नामक एक अत्यंत भाग्यशाली पुत्र उत्पन्न किया जो अत्यंत सुंदर, अपार बल और पराक्रम से संपन्न था। | mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दत्त्वा वरमजेयत्वं जले सर्वत्र भारत।
साध्या जलचरा: सर्वे भविष्यन्ति न संशय:॥ ३६॥
(पुत्रमुत्पादयामास स तस्यां सुमनोहरम्।
इरावन्तं महाभागं महाबलपराक्रमम्॥ )
अनुवाद
जाते समय उन्होंने अर्जुन को यह वरदान दिया कि वह जल में अजेय होगा और सभी जलचर उसके वश में होंगे। इसमें कोई संदेह नहीं है। इस प्रकार अर्जुन ने उलूपी के गर्भ से इरावन नामक एक अत्यंत भाग्यशाली पुत्र उत्पन्न किया जो अत्यंत सुंदर, अपार बल और पराक्रम से संपन्न था।
While leaving, she blessed Arjuna with the boon that he would be invincible in water and all aquatic creatures would be under his control. There is no doubt about this. In this way, Arjuna produced a very fortunate son named Iraavan from Ulupi's womb who was very beautiful and endowed with immense strength and valour.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि अर्जुनवनवासपर्वण्युलूपीसङ्गमे च त्रयोदशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २१३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत अर्जुनवनवासपर्वमें उलूपी-समागमविषयक दो सौ तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २१३॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३७ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥