Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.213.32: मैं भी इसी आशा से आपके पास आया हूँ और दुःखी होकर आपसे बार-बार विनती करता हूँ। मैं आप पर मोहित हूँ और आपसे सान्निध्य की याचना करता हूँ। अतः आप मेरी प्रिय अभिलाषा पूर्ण करें। मुझ पर अपना सर्वस्व अर्पण करके मेरी अभिलाषा पूर्ण करें॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
साहं शरणमभ्येमि रोरवीमि च दु:खिता।
याचे त्वां चाभिकामाहं तस्मात् कुरु मम प्रियम्।
स त्वमात्मप्रदानेन सकामां कर्तुमर्हसि॥ ३२॥
अनुवाद
मैं भी इसी आशा से आपके पास आया हूँ और दुःखी होकर आपसे बार-बार विनती करता हूँ। मैं आप पर मोहित हूँ और आपसे सान्निध्य की याचना करता हूँ। अतः आप मेरी प्रिय अभिलाषा पूर्ण करें। मुझ पर अपना सर्वस्व अर्पण करके मेरी अभिलाषा पूर्ण करें॥ 32॥
I have also come to you with the same hope and I cry and plead with you again and again in sorrow. I am infatuated with you and request you for company. So please fulfill my dear desire. Fulfill my wish by sacrificing yourself to me.॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥