Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.213.28-29: मेरी रक्षा करने से तुम्हारा धर्म नष्ट नहीं होगा। यदि तुम इस धर्म का किंचित भी उल्लंघन करोगे, तो भी मुझे जीवनदान देकर तुम अवश्य ही महान धर्म को प्राप्त करोगे। अतः हे मेरे स्वामी कुन्तीकुमार अर्जुन! मैं तुम्हारा भक्त हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करो; शत्रुओं से रक्षा करना ही सत्पुरुषों का मत है॥ 28-29॥ | mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कृत्वा मम परित्राणं तव धर्मो न लुप्यते।
यदि वाप्यस्य धर्मस्य सूक्ष्मोऽपि स्याद् व्यतिक्रम:॥ २८॥
स च ते धर्म एव स्याद् दत्त्वा प्राणान् ममार्जुन।
भक्तां च भज मां पार्थ सतामेतन्मतं प्रभो॥ २९॥
अनुवाद
मेरी रक्षा करने से तुम्हारा धर्म नष्ट नहीं होगा। यदि तुम इस धर्म का किंचित भी उल्लंघन करोगे, तो भी मुझे जीवनदान देकर तुम अवश्य ही महान धर्म को प्राप्त करोगे। अतः हे मेरे स्वामी कुन्तीकुमार अर्जुन! मैं तुम्हारा भक्त हूँ, कृपया मुझे स्वीकार करो; शत्रुओं से रक्षा करना ही सत्पुरुषों का मत है॥ 28-29॥
By protecting me your Dharma will not be lost. Even if you slightly violate this Dharma, by giving me life you will definitely achieve great Dharma. Therefore, my lord Kuntikumar Arjun! I am your devotee, please accept me; this protection from the enemy is the opinion of the good men.॥ 28-29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥