Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.213.26-27: अतः तुम्हारे बड़े भाई ने धर्म की रक्षा के लिए ही द्रौपदी को बहाने से वहाँ परस्पर प्रवास का नियम बनाया है। तुम्हारा धर्म यहाँ भ्रष्ट न हो। विशाल नेत्रों वाले अर्जुन! तुम्हें संकटग्रस्त प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए॥26-27॥ | mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदिदं द्रौपदीहेतोरन्योन्यस्य प्रवासनम्॥ २६॥
कृतवांस्तत्र धर्मार्थमत्र धर्मो न दुष्यति।
परित्राणं च कर्तव्यमार्तानां पृथुलोचन॥ २७॥
अनुवाद
अतः तुम्हारे बड़े भाई ने धर्म की रक्षा के लिए ही द्रौपदी को बहाने से वहाँ परस्पर प्रवास का नियम बनाया है। तुम्हारा धर्म यहाँ भ्रष्ट न हो। विशाल नेत्रों वाले अर्जुन! तुम्हें संकटग्रस्त प्राणियों की रक्षा करनी चाहिए॥26-27॥
Therefore, your elder brother has made this rule of mutual migration there, using Draupadi as an excuse only, to protect Dharma. Your Dharma does not get corrupted here. Huge-eyed Arjuna! You should protect distressed beings.॥26-27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥