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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.213.24 
उलूप्युवाच
जानाम्यहं पाण्डवेय यथा चरसि मेदिनीम्।
यथा च ते ब्रह्मचर्यमिदमादिष्टवान् गुरु:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उलूपी बोली - हे पाण्डुपुत्र! मैं जानती हूँ कि आप किस उद्देश्य से पृथ्वी पर विचरण कर रहे हैं और आपके बड़े भाई ने आपको ब्रह्मचर्य का पालन करने का आदेश क्यों दिया है।
 
Ulupi said - O son of Pandu! I know the purpose for which you are roaming the earth and why your elder brother has ordered you to observe celibacy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)