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mahabharat 1.213.23: हे नाग कन्या! ऐसा कुछ करो जिससे मुझ पर झूठ बोलने का आरोप न लगे, तुम्हें अच्छा लगे और मेरे धर्म की भी हानि न हो॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.213.23 
कथं च नानृतं मे स्यात् तव चापि प्रियं भवेत्।
न च पीडॺेत मे धर्मस्तथा कुर्या भुजङ्गमे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे नाग कन्या! ऐसा कुछ करो जिससे मुझ पर झूठ बोलने का आरोप न लगे, तुम्हें अच्छा लगे और मेरे धर्म की भी हानि न हो॥ 23॥
 
O Naga Kanya! Do something such that I am not accused of lying, it is pleasing to you and my religion is not harmed. ॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)