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mahabharat 1.213.21: अर्जुन बोले - भद्रे! यह मेरे बारह वर्षों के ब्रह्मचर्य व्रत का समय है। धर्मराज युधिष्ठिर ने मुझे इस व्रत का पालन करने का आदेश दिया है। अतः मैं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा हूँ।   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.213.21 
अर्जुन उवाच
ब्रह्मचर्यमिदं भद्रे मम द्वादशवार्षिकम्।
धर्मराजेन चादिष्टं नाहमस्मि स्वयंवश:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - भद्रे! यह मेरे बारह वर्षों के ब्रह्मचर्य व्रत का समय है। धर्मराज युधिष्ठिर ने मुझे इस व्रत का पालन करने का आदेश दिया है। अतः मैं अपने आप पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा हूँ।
 
Arjun said - Bhadre! This is the time for my celibacy vow which will last for twelve years. Dharmaraja Yudhishthira has ordered me to follow this vow. Therefore, I am not in control of myself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)