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mahabharat 1.213.2-3: वेदों के विद्वान, आध्यात्मिक चिन्तक, ब्रह्मचारी, भगवद्भक्त, पुराणों के ज्ञाता, अन्य कथावाचक, तपस्वी, वानप्रस्थ तथा मधुर वाणी से दिव्य कथा कहने वाले ब्राह्मण, ये सभी अर्जुन के साथ गए।   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.213.2-3 
वेदवेदाङ्गविद्वांसस्तथैवाध्यात्मचिन्तका:।
भैक्षाश्च भगवद्भक्ता: सूता: पौराणिकाश्च ये॥ २॥
कथकाश्चापरे राजन् श्रमणाश्च वनौकस:।
दिव्याख्यानानि ये चापि पठन्ति मधुरं द्विजा:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वेदों के विद्वान, आध्यात्मिक चिन्तक, ब्रह्मचारी, भगवद्भक्त, पुराणों के ज्ञाता, अन्य कथावाचक, तपस्वी, वानप्रस्थ तथा मधुर वाणी से दिव्य कथा कहने वाले ब्राह्मण, ये सभी अर्जुन के साथ गए।
 
Scholars of the Vedas, spiritual contemplators, mendicant celibates, devotees of God, connoisseurs of the Puranas, other story tellers, ascetics, Vanaprasthas and those Brahmins who recite divine stories in a melodious voice, all of them went with Arjun. 2-3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)