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mahabharat 1.213.17: भीरु! तुमने ऐसा साहस क्यों किया? भाविनी! यह कौन सा देश है? सुभागे! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो?॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.213.17 
किमिदं साहसं भीरु कृतवत्यसि भाविनि।
कश्चायं सुभगे देश: का च त्वं कस्य वाऽऽत्मजा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भीरु! तुमने ऐसा साहस क्यों किया? भाविनी! यह कौन सा देश है? सुभागे! तुम कौन हो? किसकी पुत्री हो?॥17॥
 
‘Bhiru! Why have you mustered up such courage? Bhavini! Which country is this? Subhaage! Who are you? Whose daughter are you?’॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)