Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.213.12-13: राजन! वहाँ स्नान करके पितरों का तर्पण करके अग्निहोत्र करने के लिए वे जल से बाहर आने ही वाले थे कि नागराज की पुत्री उलूपी ने उन पर मोहित होकर महाबाहु अर्जुन को जल से बाहर खींच लिया। 12-13॥ | mahabharat अध्याय 1.213: अर्जुनका गंगाद्वारमें ठहरना और वहाँ उनका उलूपीके साथ मिलन । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राभिषेकं कृत्वा स तर्पयित्वा पितामहान्।
उत्तितीर्षुर्जलाद् राजन्नग्निकार्यचिकीर्षया॥ १२॥
अपकृष्टो महाबाहुर्नागराजस्य कन्यया।
अन्तर्जले महाराज उलूप्या कामयानया॥ १३॥
अनुवाद
राजन! वहाँ स्नान करके पितरों का तर्पण करके अग्निहोत्र करने के लिए वे जल से बाहर आने ही वाले थे कि नागराज की पुत्री उलूपी ने उन पर मोहित होकर महाबाहु अर्जुन को जल से बाहर खींच लिया। 12-13॥
Rajan! After taking bath there and offering prayers to the ancestors, they were about to come out of the water to perform Agnihotra, when Ulupi, the daughter of the king of Nagas, being infatuated with them, pulled the mighty-armed Arjun out of the water. 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥