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mahabharat 1.212.34: अर्जुन बोले - प्रभु ! मैंने आपके मुख से सुना है कि धर्म के मार्ग पर चलते हुए कभी बहाना नहीं बनाना चाहिए । अतः मैं सत्य की शपथ लेकर शस्त्र स्पर्श करता हूँ कि मैं सत्य से विचलित नहीं होऊँगा ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  1.212.34 
अर्जुन उवाच
न व्याजेन चरेद् धर्ममिति मे भवत: श्रुतम्।
न सत्याद् विचलिष्यामि सत्येनायुधमालभे॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - प्रभु ! मैंने आपके मुख से सुना है कि धर्म के मार्ग पर चलते हुए कभी बहाना नहीं बनाना चाहिए । अतः मैं सत्य की शपथ लेकर शस्त्र स्पर्श करता हूँ कि मैं सत्य से विचलित नहीं होऊँगा ॥ 34॥
 
Arjun said - Lord! I have heard from your mouth that one should never make excuses while following the path of Dharma. Therefore, I swear by truth and touch the weapon that I will not deviate from the truth. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)