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mahabharat 1.212.33: अतः हे महाबली! मेरी बात सुनो; वन जाने का विचार त्याग दो। न तो तुमने अपना धर्म खोया है और न ही मेरा अपमान किया है।॥33॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.212.33 
निवर्तस्व महाबाहो कुरुष्व वचनं मम।
न हि ते धर्मलोपोऽस्ति न च ते धर्षणा कृता॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
अतः हे महाबली! मेरी बात सुनो; वन जाने का विचार त्याग दो। न तो तुमने अपना धर्म खोया है और न ही मेरा अपमान किया है।॥33॥
 
‘Therefore, O mighty one, listen to me; give up the idea of going to the forest. Neither have you lost your Dharma, nor have you insulted me.’॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)