Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.212.3: पाण्डव द्रौपदी के साथ बहुत प्रसन्न थे और द्रौपदी अपने पाँचों वीर पतियों के साथ बहुत प्रसन्न थी, जैसे भोगवतीपुरी सर्पों के रहने से अत्यंत सुन्दर हो जाती है ॥3॥ | mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते तया तैश्च सा वीरै: पतिभि: सह पञ्चभि:।
बभूव परमप्रीता नागैर्भोगवती यथा॥ ३॥
अनुवाद
पाण्डव द्रौपदी के साथ बहुत प्रसन्न थे और द्रौपदी अपने पाँचों वीर पतियों के साथ बहुत प्रसन्न थी, जैसे भोगवतीपुरी सर्पों के रहने से अत्यंत सुन्दर हो जाती है ॥3॥
The Pandavas were very happy with Draupadi and Draupadi was very happy with her five valiant husbands, just as Bhogavatipuri becomes extremely beautiful when the serpents live there. ॥3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥