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mahabharat 1.212.15: इस तपस्वी ब्राह्मण के गोधन का अपहरण हो रहा है; अतः ऐसे समय में इसके आँसू पोंछना मेरा कर्तव्य है। यह मेरा निश्चय है॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.212.15 
ह्रियमाणे धने तस्मिन् ब्राह्मणस्य तपस्विन:।
अश्रुप्रमार्जनं तस्य कर्तव्यमिति निश्चय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस तपस्वी ब्राह्मण के गोधन का अपहरण हो रहा है; अतः ऐसे समय में इसके आँसू पोंछना मेरा कर्तव्य है। यह मेरा निश्चय है॥15॥
 
‘This ascetic Brahmin's cattle are being kidnapped; therefore, at such a time it is my duty to wipe away his tears. This is my determination.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)