Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.212.12-13: जहाँ महात्मा पाण्डवों के अस्त्र-शस्त्र रखे थे, वहाँ धर्मराज युधिष्ठिर श्रीकृष्ण के साथ अकेले बैठे थे। अतः पाण्डुपुत्र अर्जुन न तो उस घर में प्रवेश कर सके और न ही चोरों का पीछा खाली हाथ कर सके। 12-13॥ | mahabharat अध्याय 1.212: अर्जुनके द्वारा ब्राह्मणके गोधनकी रक्षाके लिये नियमभंग और वनकी ओर प्रस्थान । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आयुधानि च यत्रासन् पाण्डवानां महात्मनाम्॥ १२॥
कृष्णया सह तत्रास्ते धर्मराजो युधिष्ठिर:।
सम्प्रवेशाय चाशक्तो गमनाय च पाण्डव:॥ १३॥
अनुवाद
जहाँ महात्मा पाण्डवों के अस्त्र-शस्त्र रखे थे, वहाँ धर्मराज युधिष्ठिर श्रीकृष्ण के साथ अकेले बैठे थे। अतः पाण्डुपुत्र अर्जुन न तो उस घर में प्रवेश कर सके और न ही चोरों का पीछा खाली हाथ कर सके। 12-13॥
Where the weapons of Mahatma Pandavas were kept, Dharmaraja Yudhishthir was sitting alone with Krishna. Therefore, Pandu's son Arjun could neither enter the house nor chase the thieves empty handed. 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥