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mahabharat 1.211.d4: हे मनुष्यों के स्वामी जनमेजय! मैंने तुम्हें उस समय घटित हुई घटनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है।   |   mahabharat अध्याय 1.211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  1.211.d4 
(एतद् विस्तरश: सर्वमाख्यातं ते नरेश्वर।
काले च तस्मिन् सम्पन्नं यथावज्जनमेजय॥ )
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी जनमेजय! मैंने तुम्हें उस समय घटित हुई घटनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन किया है।
 
O lord of men, Janamejaya! I have told you in detail about the events that happened at that time.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि विदुरागमनराज्यलम्भपर्वणि सुन्दोपसुन्दोपाख्याने एकादशाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २११॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत विदुरागमनराज्यलम्भपर्वमें सुन्दोपसुन्दोपाख्यानविषयक दो सौ ग्यारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २११॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ३ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३४ १/२ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)