श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.211.9 
ततस्तिलोत्तमा तत्र वने पुष्पाणि चिन्वती।
वेशं साऽऽक्षिप्तमाधाय रक्तेनैकेन वाससा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
इसी समय तिलोत्तमा वन में पुष्प तोड़ती हुई वहाँ आई। उसने केवल एक लाल रंग की सुन्दर साड़ी पहन रखी थी। उसने ऐसा वस्त्र धारण किया था कि कोई भी पुरुष उसे देखकर पागल हो जाए॥9॥
 
At this time Tilottama came there picking flowers in the forest. She was wearing only one red colored fine sari. She was wearing such an attire that it could drive any man crazy.॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)