श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.211.6 
तत: कदाचिद् विन्ध्यस्य प्रस्थे समशिलातले।
पुष्पिताग्रेषु शालेषु विहारमभिजग्मतु:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर एक दिन वे दोनों राक्षस विंध्य पर्वत के शिखर पर भ्रमण करते हुए गए, जहाँ पथरीली भूमि समतल थी और जहाँ ऊँचे-ऊँचे साल वृक्षों की शाखाएँ फूलों से लदी हुई थीं॥6॥
 
Subsequently, one day, those two demons went for a walk to the peak of Vindhya Mountain, where the rocky land was flat and where the branches of tall sal trees were full of flowers. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)