श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.211.31 
एवं तै: समय: पूर्वं कृतो नारदचोदितै:।
न चाभिद्यन्त ते सर्वे तदान्योन्येन भारत॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
भरत! इस प्रकार नारदजी की प्रेरणा से पाण्डवों ने पहले ही नियम बना लिए थे। इसीलिए वे सब कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हुए॥31॥
 
Bhaarat! Thus, with the inspiration of Naradji, the Pandavas had already made rules. That is why they all never became opposed to each other.॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)