श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.211.17 
नैषा तव ममैषेति ततस्तौ मन्युराविशत्।
तस्या रूपेण सम्मत्तौ विगतस्नेहसौहृदौ॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'यह तुम्हारा नहीं, मेरा है' ऐसा कहते हुए वे दोनों क्रोधित हो गए। तिलोत्तमा के सौन्दर्य से मदमस्त होकर वे दोनों प्रेम और स्नेह से शून्य हो गए। 17.
 
While saying, 'This is not yours, it is mine', both of them became angry. Being intoxicated by the beauty of Tilottama, both of them became void of love and affection. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)