श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.211.14 
वरप्रदानमत्तौ तावौरसेन बलेन च।
धनरत्नमदाभ्यां च सुरापानमदेन च॥ १४॥
 
 
अनुवाद
एक ओर तो वह दुर्लभ वरदान के नशे में उन्मत्त था, दूसरी ओर वह अपनी स्वाभाविक शक्ति के नशे में उन्मत्त था। इसके अतिरिक्त वह धन, रत्न और मदिरा के नशे में भी उन्मत्त था॥14॥
 
On one hand he was mad with the intoxication of the rare boon and on the other hand he was intoxicated with his natural strength. Besides this he was also mad with the intoxication of wealth, gems and drinking alcohol.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)