श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.211.11 
तौ तु पीत्वा वरं पानं मदरक्तान्तलोचनौ।
दृष्ट्वैव तां वरारोहां व्यथितौ सम्बभूवतु:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों ने बहुत ही उत्तम मादक रस पीया था, जिससे मद के कारण उनकी आँखें कुछ-कुछ लाल हो गई थीं। तिलोत्तमा के उस सुन्दर शरीर को देखकर दोनों राक्षस काम-वेदना से पीड़ित हो गए॥11॥
 
Both of them had drunk very good intoxicating juice, due to which their eyes had become a little red due to intoxication. On seeing that beautiful body of Tilottama, both the demons were tormented by sexual anguish. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)