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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 211: तिलोत्तमापर मोहित होकर सुन्द-उपसुन्दका आपसमें लड़ना और मारा जाना एवं तिलोत्तमाको ब्रह्माजीद्वारा वरप्राप्त तथा पाण्डवोंका द्रौपदीके विषयमें नियम-निर्धारण
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श्लोक 10
श्लोक
1.211.10
नदीतीरेषु जातान् सा कर्णिकारान् प्रचिन्वती।
शनैर्जगाम तं देशं यत्रास्तां तौ महासुरौ॥ १०॥
अनुवाद
नदी के किनारे उगे हुए कनेर के फूलों को बटोरकर वह धीरे-धीरे उस स्थान की ओर चली जहाँ वे दोनों महान राक्षस बैठे थे॥10॥
Gathering oleander flowers that grew on the riverbank, she slowly went towards the spot where the two great demons were sitting.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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