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mahabharat 1.210.4-10: वहाँ भगवान महादेव, अग्निदेव सहित वायु, चन्द्रमा, सूर्य, इन्द्र, ब्रह्मपुत्र महर्षि, वैखानस (वनवासी), बालखिल्य, वानप्रस्थ, मरीचिप, अजन्मा, अविमूढ़ और तेजोगर्भ आदि नाना प्रकार के तपस्वी ऋषिगण ब्रह्माजी के पास आए। उन सभी महर्षियों ने पास जाकर ब्रह्माजी को नम्रतापूर्वक सुन्द और उपसुन्द के समस्त क्रूर कर्मों का वृत्तांत सुनाया। दैत्यों ने जिस प्रकार लूटमार की, जिस प्रकार और जिस क्रम से लोगों को मारा, वह सब समाचार ब्रह्माजी को भली-भाँति सुनाया। तब समस्त देवताओं और ऋषियों ने भी ब्रह्माजी को इस विषय में प्रेरित किया। उन सबकी बातें सुनकर ब्रह्माजी ने कुछ क्षण विचार किया। फिर उन्होंने उन दोनों के वध का निश्चय करके विश्वकर्मा को बुलाया।   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 4-10
 
 
श्लोक  1.210.4-10 
तत्र देवो महादेवस्तत्राग्निर्वायुना सह।
चन्द्रादित्यौ च शक्रश्च पारमेष्ठॺास्तथर्षय:॥ ४॥
वैखानसा बालखिल्या वानप्रस्था मरीचिपा:।
अजाश्चैवाविमूढाश्च तेजोगर्भास्तपस्विन:॥ ५॥
ऋषय: सर्व एवैते पितामहमुपागमन्।
ततोऽभिगम्य ते दीना: सर्व एव महर्षय:॥ ६॥
सुन्दोपसुन्दयो: कर्म सर्वमेव शशंसिरे।
यथा हृतं यथा चैव कृतं येन क्रमेण च॥ ७॥
न्यवेदयंस्तत: सर्वमखिलेन पितामहे।
ततो देवगणा: सर्वे ते चैव परमर्षय:॥ ८॥
तमेवार्थं पुरस्कृत्य पितामहमचोदयन्।
तत: पितामह: श्रुत्वा सर्वेषां तद् वचस्तदा॥ ९॥
मुहूर्तमिव संचिन्त्य कर्तव्यस्य च निश्चयम्।
तयोर्वधं समुद्दिश्य विश्वकर्माणमाह्वयत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वहाँ भगवान महादेव, अग्निदेव सहित वायु, चन्द्रमा, सूर्य, इन्द्र, ब्रह्मपुत्र महर्षि, वैखानस (वनवासी), बालखिल्य, वानप्रस्थ, मरीचिप, अजन्मा, अविमूढ़ और तेजोगर्भ आदि नाना प्रकार के तपस्वी ऋषिगण ब्रह्माजी के पास आए। उन सभी महर्षियों ने पास जाकर ब्रह्माजी को नम्रतापूर्वक सुन्द और उपसुन्द के समस्त क्रूर कर्मों का वृत्तांत सुनाया। दैत्यों ने जिस प्रकार लूटमार की, जिस प्रकार और जिस क्रम से लोगों को मारा, वह सब समाचार ब्रह्माजी को भली-भाँति सुनाया। तब समस्त देवताओं और ऋषियों ने भी ब्रह्माजी को इस विषय में प्रेरित किया। उन सबकी बातें सुनकर ब्रह्माजी ने कुछ क्षण विचार किया। फिर उन्होंने उन दोनों के वध का निश्चय करके विश्वकर्मा को बुलाया।
 
There Lord Mahadev, Vayu along with Agnidev, Moon, Sun, Indra, Brahmaputra Maharshi, Vaikhanas (forest dweller), Balkhilya, Vanaprastha, Marichip, Unborn, Avimudh and Tejogarbha etc., various types of ascetic sages came to Brahmaji. All those great sages went near and humbly narrated to Brahmaji the story of all the cruel deeds of Sunda and Upasunda. The manner in which the demons looted, the way and the order in which they killed people, all that news was completely told to Brahmaji. Then all the gods and sages also inspired Brahmaji regarding this matter. After listening to all of them, Lord Brahma thought for a few minutes. Then he decided to kill both of them and called Vishwakarma. 4-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)