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mahabharat 1.210.29: अन्य देवताओं और ऋषियों के मुख भी उसी ओर मुड़ गए, जिस ओर तिलोत्तमा गई।29   |   mahabharat अध्याय 1.210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 210: तिलोत्तमाकी उत्पत्ति, उसके रूपका आकर्षण तथा सुन्दोपसुन्दको मोहित करनेके लिये उसका प्रस्थान  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.210.29 
तथा देवनिकायानां महर्षीणां च सर्वश:।
मुखानि चाभ्यवर्तन्त येन याति तिलोत्तमा॥ २९॥
 
 
अनुवाद
अन्य देवताओं और ऋषियों के मुख भी उसी ओर मुड़ गए, जिस ओर तिलोत्तमा गई।29
 
The faces of the other gods and sages also turned in the direction in which Tilottama went. 29
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)